ग्रामीण विकासपशुपालन

Donkey Farming: गधा पालन व्यवसाय [करियर और संभावनाएं]

गधा पालन का व्यवसाय बहुत ही प्राचीन समय से की जा रही है। आज के समय में गधी की दूध की उपयोगिता देखते ही हुए इसका महत्व भी काफी बढ़ रहा है। 

Donkey Farming: गधा पालन का व्यवसाय बहुत ही प्राचीन समय से की जा रही है। मुख्य रूप में गधा पालन का व्यवसाय धोबी संप्रदाय के लोगों तक ही सीमित था।

भारत में गधों की केवल 3 प्रजातियां पाई जाती है। हालांकि देश में कई प्रकार के घरेलू गधे भी पाए जाते हैं। 

आज के समय में गधी की दूध की उपयोगिता देखते ही हुए इसका महत्व भी काफी बढ़ रहा है। 

गधा पालन का तरीका 

घोड़े की नस्ल से संभंधित होने के बावजूद गधे का शरीर, स्वभाव और भावनाओं के मामले में कई तरह से भिन्न होता है। 

गधा के गुण

  • गधे के पास बहुत ही धैर्य क्षमता होती है। 
  • यह किसी भी दर्द को झेलने में सक्षम है। 
  • एक ऐसा जानवर जो किसी भी परिस्थिती में डर नहीं दिखाता है। 
  • गधे दूसरे जानवरों के साथ रहना पसंद करते हैं। 
  • 60-80 किलो का वजन का गधा अपनी पीठ पर 30-40 किलो का वजन आसानी से ढो लेता है। 
  • गधा पालन का तरीका 

    भोजन 

    गधों में बकरियों और गायों की तरह चरने की प्रवृत्ति होती है। रेशेदार घास और पौधों को चरने के लिए दें, क्योंकि गधा इन्हें आसानी से पचा लेता है। गधे के शरीर के वजन का 1.5 प्रतिशत शुष्क पदार्थ के रूप खिलाना चाहिए। गधों को घास के आलावा पोषक तत्व से भरपूर आहार भी देना चाहिए। इसके साथ ही स्वच्छ पानी ही पीने के लिए दें। 

    आवास प्रबंधन 

  • प्रति गधे के लिए 2-3 वर्गमीटर जगह की आवश्यकता होती है। 
  • गधों को जिस स्थान पर बांधा जाता है। वह स्थान स्वच्छ होना चाहिए। 
  • गधों के बाड़े में रोशनी और पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। 
  • गर्भावस्था के लक्षण

    • गधी बार-बार अपना मुंह खोलती और बंद करती है। 
    • कानों के पीछे की ओर झुकाती है। 
    • जल्दी पेशाब आना
    • गधी की प्रजनन की जानकारी 

      • 2 साल में नर और मादा प्रजनन की उम्र तक पहुंच जाते हैं। 
      • मासिक धर्म के लक्षण हर 20-28 दिनों में दिखाई देते हैं। 
      • गधी का गर्भकाल 360 से 376 दिनों का होता है। 
      • गधी 20 से 25 साल तक प्रजनन करती है। 
      • गधी के दूध के फायदे

        • गधी के दूध औषधीय गुणों से भरा होता है। 
        • गधी के दूध का उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और बच्चों की स्पष्ट बोलने की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। 
        • गधी के दूध का उपयोग बढ़ती उम्र, सर्दी, खांसी, पीलिया, सिरदर्द, शरीर में दर्द और त्वचा रोगों और लिवर की बीमारियों को रोकने के लिए किया जाता है। 
        • ये तो थी, गधा पालन व्यवसाय की जानकारी। ऐसे ही पशुपालन व्यवसाय और कृषि की उन्नत जानकारी के लिए द रूरल इंडिया वेबसाइट विजिट करें। 

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