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Bhindi ki kheti: भिंडी की खेती कैसे करें? यहां जानें

भिंडी की मांग सालभर रहती है। यदि किसान भिंडी की खेती (bhindi ki kheti) करना चाहते हैं तो इसकी खेती करके अच्छी आमदनी ले सकते हैं।  

bhindi ki kheti: भिंडी (lady finger) पोषक तत्वों से भरपूर एक सब्जी है। इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ए, बी और विटामिन सी होता है। डायबटीज के लिए भिंडी बहुत ही फायदेमंद होता है। भिंडी (lady finger) खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होती है। ऐसे तो भिंडी की मांग सालभर रहती है लेकिन गर्मियों की इसकी मांग बढ़ जाती है। इसकी मांग अधिक होने से इसकी बिक्री जल्दी हो जाती है। यदि किसान भिंडी की खेती (bhindi ki kheti) करना चाहते हैं तो इसकी उन्नत खेती करके अच्छी आमदनी ले सकते हैं।  

 

तो आइए, The Rural India के इस लेख में भिंडी की खेती (bhindi ki kheti) के बारे में विस्तार से जानें।

bhindi ki kheti: भिंडी की खेती कैसे करें

आप इस ब्लॉग में जानेंगे-

  • भिंडी की खेती के लिए उपुक्त मिट्टी और जलवायु
  • खेती की तैयारी कैसे करें
  • भिंडी की बुआई का समय
  • बुआई की विधि
  • सिंचाई प्रबंधन
  • उर्वरक प्रबंधन
  • भिंडी की उन्नत किस्में
  • भिन्डी की खेती में खरपतवार पर नियंत्रण
  • भिंडी में लगने वाले रोग और रोकथाम
  • भिंडी की तुड़ाई  
  • पैदावार और लाभ

 

भिंडी की खेती के लिए उपुक्त मिट्टी और जलवायु

भिंडी की खेती के लिए बलुई और दोमट मिट्टी दोनों ही उपयुक्त मानी जाती है। इसके लिए मिट्टी का पीएच मान 7 से 7.5 लगभग होना चाहिए। भिंडी की खेती के लिए नमी वाले जलवायु को उपयुक्त माना जाता है। सर्दियों में इस फसल का रखरखाव ज्यादा करना पड़ता है क्योंकि ठंडी में गिरने वाला पाला इसकी फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

 

खेत की तैयारी कैसे करें

भिंडी की अच्छी उपज के लिए सबसे पहले अच्छी तरह से खेत की जुताई कर दें और उचित मात्रा में कंपोस्ट खाद डालने के बाद फिर से खेत की जुताई करवा दे ताकि खाद मिट्टी में अच्छी तरह से मिल जाए।

 

इसके बाद खेत में पानी भर दें। फिर दो से तीन दिन बाद जब खेत की मिट्टी थोड़ी-थोड़ी सूख गयी हो, तो उसमे पाटा लगा कर खेत की जुताई करा दें जिससे खेत बराबर हो जाए।

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भिंडी की बुआई का समय

गर्मी के मौसम में भिंडी की बुआई फरवरी-मार्च में की जाती है। वहीं बरसात में भिंडी की बुआई जून-जुलाई में की जाती है। यदि भिंडी की फसल लगातार लेनी है तो तीन सप्ताह के अंतराल पर फरवरी से जुलाई के मध्य अलग-अलग खेतों में भिंडी की बुआई कर सकते हैं। आपको बता दें, ग्रीष्मकालीन भिंडी जल्दी लगती है। जबकि बरसात के मौसम की भिंडी की फसल देर से लगती है। 

 

बुआई की विधि

  • भिंडी के बीजों को खेत में लगाने से पहले उन्हें गोमूत्र या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव कर लें। 
  • इसके बीजों की बुआई खेतों में मशीन और हाथ दोनों ही तरीके से कर सकते हैं। 
  • इस फसल की बुआई के लिए बनाई गई प्रत्येक पंक्ति के बीच एक फीट की दूरी और पौधों के बीच  लगभग 15 सेंटीमीटर की दूरी रखें। 
  • यदि फसल बारिश के मौसम में की गयी है, तो पंक्तियों के बीच डेढ़ से दो फ़ीट की दूरी और प्रत्येक पौधों के बीच 25-30 सेंटीमीटर रखें।  

 

भिंडी की खेती में सिंचाई प्रबंधन

भिंडी की बुआई अगर आद्र जलवायु में की गई हो तो तुरंत सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। भिंडी के पौधों की सिंचाई के बीच 10-15 दिन का अंतर रखें। अगर गर्मी अधिक हो रही है, तो सप्ताह में दो बार सिंचाई करें। 

 

उर्वरक प्रबंधन

भिंडी की फसल की अच्छी उपज के लिए मिट्टी में उवर्रक उचित मात्रा में होना जरूरी है। खेत की जुताई करते समय पुराने गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद को खेत में डालकर अच्छे से मिला दें। इसके अलावा रासायनिक खाद में N.P.K की खाद और यूरिया का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

 

भिंडी की उन्नत किस्में

कुछ किस्मों को दोनों मौसमों में बोया जाता है। भिंडी की बहुत सी किस्में पाई जाती है।

  • परभन क्रांतिपूसा सावनी
  •  पंजाब पद्मनी
  • पूजा ए-4
  • अर्का भय
  • अर्का अनामिका
  •  पंजाब-7
  •  पंजाब-13 

 

अन्य किस्में

  • वर्षा
  • उपहार
  • वैशाली
  • लाल हाइब्रिड
  • ई.एम.एस.-8 (म्यूटेंट)
  • विजय
  • विशाल

 

भिंडी की खेती में खरपतवार नियंत्रण

भिंडी की फसल में आप खरपतवार नियंत्रण के लिए खेत में फ्लूक्लोरेलिन का छिड़काव भी कर सकते हैं। या फिर आप निराई-गुड़ाई की विधि भी अपना सकते हैं। बुआई के 20 दिन बाद गुड़ाई कर दें। इसके बाद 15 से 20 दिन के अंतराल में इसकी निराई- गुड़ाई करते रहें। 

 

भिंडी में लगने वाले रोग और रोकथाम

फल छेदक रोग (Fruit Borer Disease)

इस तरह का रोग में कीड़े भिंडी को खाकर खोखला कर देते हैं। इसके अलावा यह रोग पौधों के तने पर भी देखने को मिलता है। इसके निदान के लिए प्रोफेनोफॉस या क्विनॉलफॉस का छिड़काव करें।

 

पीत शिरा कीट रोग (Yellow Vein Pest Disease)

यह एक वायरस जनित रोग होता है। जिसमें भिंडी की पत्तियां पीली पड़ जाती है और नयी निकलने वाली शाखाएं भी पीली पड़ जाती है। इससे बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड या डाइमिथोएट का छिड़काव किया जाता है।

 

चूर्णिल आसिता कीट रोग (Powdery Mildew Pest Disease)

इस रोग में भिंडी की पत्तियों पर सफेद रंग का पाउडर और सफेद धब्बे दिखाई पड़ने लगते है जिससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण नहीं हो पाता है। इस रोग से बचाने के लिए डायनोकेप और गंधक  का छिड़काव करें। 

 

लाल मकड़ी रोग (Red Spider Disease)

भिंडी में लाल मकड़ी का रोग पौधे की लंबाई नही बढती है। इस रोग में सफ़ेद मक्खियों झुंड बनाकर पौधे के निचले सतह पर रहती है। जिससे पौधा सुख जाता है। डाइकोफॉल या गंधक केछिड़काव कर इस रोग की रोकथाम किया जा सकता है।

 

भिंडी की तुड़ाई  

भिंडी के किस्म के पौधे लगभग 40-50 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं। पूरे फसल की तुड़ाई इकठ्ठा न करें। पहली तुड़ाई के 4 से 5 दिन बाद तुड़ाई करें। इसके फल पकने से पहले तुड़ाई कर लेनी चाहिए। इसकी तुड़ाई के लिए शाम के समय उपयुक्त होता है जिससे सुबह तक सब्जी ताजा रहती है। 

 

पैदावार और लाभ

भिंडी की से कम खर्च में अच्छा लाभ पा सकते हैं। भिंडी सालाना की पैदावार 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर हो सकती है। बाजार में भिंडी का मूल्य लगभग 20-40 रूपये प्रति किलो होता है। इस तरह से एक बार में भिंडी की खेती से प्रति हेक्टेयर लगभग डेढ़ से दो लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

 

ये तो थी, भिंडी की खेती (bhindi ki kheti) की बात। यदि आप इसी तरह कृषि, मशीनीकरण, सरकारी योजना, बिजनेस आइडिया और ग्रामीण विकास की जानकारी चाहते हैं तो इस वेबसाइट की अन्य लेख जरूर पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ने के लिए शेयर करें।

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