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Artemisia ki kheti: आर्टीमीशिया की खेती की संपूर्ण जानकारी

आर्टीमीशिया (artemisia) एक औषधीय पौधा है। इसका उपयोग मलेरियारोधी दवा बनाने में होता है। आइए, इस लेख में आर्टीमीशिया की खेती के बारे में जानें.

artemisia ki kheti: अगर किसानों को खेती से अच्छी आमदनी करना है तो उन्हें परंपरागत खेती के साथ-साथ औषधीय खेती पर भी ध्यान देना होगा।

इसी क्रम में आज हम आपको आर्टीमीशिया की खेती (artemisia ki kheti) के बारे में बता रहे हैं। जिससे आप भी इस पौधे की खेती के बारे में जान सकें और व्यवसायिक खेती को अपना सकें। 

आर्टीमीशिया (artemisia) एक औषधीय पौधा है। इस पौधों का उपयोग मलेरिया रोधी दवा बनाने में होता है। इसकी फसल को बेचने के लिए किसानों को ज्यादा मशक्त नहीं करनी पड़ती है। इसके लिए आप दवा बनाने वाली कंपनियों की डिमांड के अनुसार भी खेती कर सकते हैं। आपको बता दें, इसकी खेती के लिए पानी की अधिक आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा खाद की भी बहुत अधिक जरूरत नहीं पड़ती है। 

आर्टीमीशिया की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु

आर्टीमीशिया की खेती (artemisia ki kheti) के लिए सर्दी और मध्यम गर्मी अच्छी मानी जाती है। इसकी खेती सभी तरह की मिट्टी में हो सकती है। लेकिन काली, दोमट, रेतीली से लाल मिट्टी अच्छी मानी जाती है। जहां आप इसकी खेती करना हो, वहां की जमीन जलभराव से मुक्त होनी चाहिए। वहीं मिट्टी का पीएच मान 4.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। 

बुआई का समय

इसकी बुआई बारिश के बाद वाले समय और दूसरा गर्मियों के दौरान की जाती है। सितंबर-अक्टूबर के दौरान नर्सरी में भी बुआई कर सकते हैं।  गर्मियों में फसल की बुआई का समय मार्च से जून के बीच का होता है। मगर पौधों की नर्सरी दिसंबर के आखिर में पूरी कर लेनी चाहिए। 

खेत की तैयारी 

  • खेत की मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरा बना लें।
  • भूमि की 1.5 फीट गहरी जुताई करें। 
  • अब इसमें जैविक खाद को समान मात्रा में मिट्टी में मिलाएं। 

पौधारोपण

रोपाई से एक दिन पहले बेड़ों को सींचना होता है। इसके लिए 6-8 सप्ताह वाले स्वस्थ और समान आकार के पौधों को ही लगाएं। पंक्तियों के बीच दूरी 30-60 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 45-60 सेमी रखें। रोपाई के बाद हल्की सिंचाई कर दें। रोपाई के 8-10 दिनों के भीतर गैप फिलिंग जरूर करें। 

सिंचाई प्रबंधन 

आर्टीमीशिया की फसल को अधिक पानी की जरुरत नहीं होती है। इसकी खेती में पौधों को पानी 10-15 दिन के अंतराल में दें। पानी देते समय इस बात का ध्यान रखें कि खेत में जल भराव न हो। 

कटाई और कमाई 

इसके पौधों को तैयार होने में 3-4 महीने का समय लगता है। एक एकड़ में 25 से 30 हजार रुपए का खर्च आता है। एक एकड़ में करीब 35 क्विंटल पत्तियों का उत्पादन हो सकता है। जिससे एक से सवा लाख तक की कमाई की जा सकती है।

आर्टीमीशिया की फसल को दवा बनाने वाली कंपनियां सीधे खेत से खरीद लेती है। इसके लिए सीधे दवा बनाने की कंपनियों के एजेंट से संपर्क कर सकते हैं।

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