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ayurveda in hindi: आयुर्वेद क्या है, यहां जानें

आयुर्वेद (ayurveda) प्राकृतिक एवं समग्र स्वास्थ्य की प्रचीन भारतीय पद्धति है। आयुर्वेद शब्द संस्कृत के दो धातुओं के संयोग से बना है।

आयुर्वेद क्या है? यहां जानें आयुर्वेद का महत्व एवं लाभ

what is ayurveda: इन दिनों लोगों का रुख अब आयुर्वेद (ayurveda) की ओर है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आयुर्वेद क्या है? और यह एलोपैथिक से कैसे अलग है? 

तो आइए, द रूरल इंडिया के इस ब्लॉग में सबसे पहले हम लोग जानते हैं कि आयुर्वेद क्या है?

आयुर्वेद क्या है? (what is ayurveda in hindi?)

आयुर्वेद (ayurveda) प्राकृतिक एवं समग्र स्वास्थ्य की प्रचीन भारतीय पद्धति है। आयुर्वेद शब्द संस्कृत के दो धातुओं के संयोग से बना है।

आयुः + वेद 

‘आयु’ अर्थात लम्बी उम्र (जीवन ) और ‘वेद’ अर्थात विज्ञान)। अतः आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ जीवन का विज्ञान है।

आपको बता दें, जहां एलोपैथिक दवा बीमारी होने की मूल कारण पर ना जाकर इसको दूर करने पर केंद्रित होती है वहीं आयुर्वेद (ayurveda) हमें बीमारी होने की मूलभूत कारणों के साथ-साथ इसके इसके समग्र निदान के विषय में भी बताता है।

आयुर्वेद के मूल सिद्धांत (basic principles of ayurveda)

प्राचीन काल से भारत में आयुर्वेद की शिक्षा मौखिक रूप से गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत ऋषियों द्वारा दी जाती रही है। लगभग 5000 साल पहले इस ज्ञान को ग्रंथों का रूप दिया गया। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय आयुर्वेद के पुरातन ग्रंथ हैं। इन ग्रंथो में सृष्टि में व्याप्त पंच महाभूतों- पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश तत्वों के मनुष्यों के ऊपर होने वाले प्रभावों तथा स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए के लिए उनको संतुलित रखने के महत्ता को प्रतिपादित किया गया है। 

आयुर्वेद के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति पर इन पांच तत्वों में से कुछ तत्वों का अन्य तत्वों की तुलना में अधिक प्रभाव होता है। आयुर्वेद इन संयोगों को तीन दोषों के रूप में वर्गीकृत करता है।

  1. वात दोष- जिसमें वायु और आकाश तत्त्वों की प्रधानता हो।
  2. पित्त दोष- जिसमें अग्नि तत्त्व की प्रधानता हो।
  3. कफ दोष- जिसमें पृथ्वी और जल तत्त्वों की प्रधानता हो।

इन दोषों का प्रभाव न केवल व्यक्ति की शारीरिक संरचना पर होता है बल्कि उसकी शारीरिक प्रवृत्तियों (जैसे भोजन का चुनाव और पाचन) और उसके मन और भावनाओं पर भी होता है।

उदाहरण के लिए कफ प्रकृति के मनुष्यों का अधिक वजन वाला होना, उनकी पाचन का अन्य प्रकृति के मनुष्यों की तुलना में धीमा होना, उनकी तेज याददाश्त और भावनात्मक रूप से उनमें स्थिरता का होना पृथ्वी तत्त्व की प्रधानता के कारण होता है। अधिकांश व्यक्तियों की प्रकृति में किन्हीं दो दोषों का संयोग होता है। जैसे- पित्त-कफ प्रकृति वाले मनुष्य में पित्त और कफ दोनों दोषों का प्रभाव देखा जाता है पर पित्त दोष की प्रधानता देखी जाती है। अपनी शारीरिक संरचना और प्रकृति के ज्ञान की समझ से हम इन तत्वों को संतुलित और स्वयं को स्वस्थ रखने की दिशा में आवश्यक कदम उठा सकते हैं।

आयुर्वेद का इतिहास (History of Ayurveda)

आयुर्वेद (ayurveda) एक प्राचीन चिकित्सा विज्ञान है जो कम से कम 5,000 वर्षों से भारत में प्रचलित है। यह शब्द संस्कृत के शब्द अयुर (जीवन) और वेद (ज्ञान) से आया है। आयुर्वेद, या आयुर्वेदिक चिकित्सा को कई सदियों पहले ही वेदों और पुराणों में प्रलेखित किया गया था। यह बात और हैं कि आयुर्वेद वर्षों से विकसित हुआ है और अब योग सहित अन्य पारंपरिक प्रथाओं के साथ एकीकृत है।

आपको बता दें, आयुर्वेद (ayurveda) की खोज भारत में ही हुई थी और भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापक रूप से आयुर्वेद का अभ्यास किया जाता है। 90 प्रतिशत से अधिक भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा के किसी न किसी रूप का उपयोग करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के सेंटर फॉर स्पिरिचुअलिटी एंड हीलिंग के अनुसार इस परंपरा को पश्चिमी दुनिया में पिछले कुछ सालों में बहुत लोकप्रियता प्राप्त हुई है, हालांकि अभी भी आयुर्वेद (ayurveda) उपचार को वैकल्पिक चिकित्सा उपचार माना नहीं जाता है।

आयुर्वेद का महत्व (importance of ayurveda)

आयुर्वेद (ayurveda) का तात्पर्य है जीवन के भौतिक, मौलिक, मानसिक और आत्मिक ज्ञान। यह विज्ञान और स्वस्थ जीवन जीने की कला का सटीक संयोजन है। आयुर्वेदिक उपचार अपने व्यापक प्राकृतिक उपचार के तरीकों के लिए लोकप्रिय है जो बीमारियों पर काम करते हैं और मानव शरीर और मस्तिष्क के कल्याण में सुधार करते हैं। आयुर्वेद का मतलब केवल जप, योग, पैक लगाना और तेलों से मालिश करना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य समस्याओं के मूल कारणों को खत्म करना है।

आयुर्वेद (ayurveda) इस सिद्धांत पर आधारित है कि अपने जीवन के दौरान स्वास्थ्य को प्राप्त करने और बनाए रखने के लिए, आपको भावनाओं को संतुलित करना चाहिए, आहार में सुधार करना चाहिए, योग का अभ्यास करना चाहिए और “प्राणायाम” (साँस लेने के व्यायाम), और जीवनशैली में बदलाव करना चाहिए।

आयुर्वेद के लाभ (benefits of ayurveda)

1. स्वस्थ वजन, त्वचा और बालों के रखरखाव में मदद करती है

एक स्वस्थ आहार और आयुर्वेदिक इलाजों के माध्यम से जीवनशैली में संशोधन करके शरीर से अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। आयुर्वेद खान-पान में सुधार लाकर एक स्वस्थ वजन को मेन्टेन करने में मदद करता है। ऑर्गेनिक और प्राकृतिक तरीकों से आप स्वस्थ त्वचा पा सकते है। सिर्फ यही नही, संतुलित भोजन, टोनिंग व्यायाम और आयुर्वेदिक पूरक/सप्लीमेंट के मदद से न केवल आपका शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि मन भी प्रसन्न रहेग।

2. आयुर्वेदिक इलाज आपको तनाव से बचने में मदद करता है

योग, मेडिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, मसाज और हर्बल उपचारों का नियमित अभ्यास शरीर को शांत, डिटॉक्सिफाई और कायाकल्प करने में मदद करता है। ब्रीदिंग एक्सरसाइज शरीर पर सक्रमण को बनाए रखते हैं और कोशिकाओं में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। अवसाद और चिंता को दूर रखने के लिए आयुर्वेद में शिरोधारा, अभ्यंगम, शिरोभ्यंगम, और पद्यभंगम जैसे व्यायामों की सलाह दिया जाता है।

3. जलन और सूजन में मदद करता है

उचित आहार की कमी, अस्वास्थ्यकर भोजन दिनचर्या, अपर्याप्त नींद, अनियमित नींद पैटर्न और खराब पाचन से सूजन हो सकती है। न्यूरोलॉजिकल रोगों, कैंसर, मधुमेह, हृदय संबंधी समस्याओं, गठिया, और कई अन्य रोगों का मूल कारण सूजन से शुरू होता है। जैसे-जैसे आप अपने दोष के अनुसार खाना शुरू करते हैं, पाचन तंत्र मजबूत होने लगता है। सही समय पर कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन रक्त और पाचन तंत्र में विषाक्त पदार्थों को कम करता है। 

4. शरीर का शुद्धिकरण करता है

आयुर्वेद (ayurveda) में पंचकर्म में एनीमा, तेल मालिश, रक्त देना, शुद्धिकरण और माध्यम से शारीरिक विषाक्त पदार्थों को समाप्त करने का अभ्यास है। आयुर्वेदिक हर्बल दवाओं में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले उपयुक्त घरेलू उपचार जीरा, इलायची, सौंफ और अदरक हैं जो शरीर में अपच को ठीक करते है।

5. कैंसर, निम्न रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल सहित बाकि क्रिटिकल बीमारियों से बचाव करता है

आयुर्वेदिक उपचार कैंसर की रोकथाम के लिए भी बहुत जाने जाते हैं। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि आयुर्वेदिक आहार और विश्राम तकनीक पट्टिका बिल्डअप को कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा जड़ी बूटियों विटामिन, खनिज और प्रोटीन की एक बूस्ट प्रदान करती है। 

इसके अलावा आयुर्वेद (ayurveda) ने पुरातन चिकित्सा शास्त्र के अन्य रूपों जैसे- तिब्बती चिकित्सा और पारंपरिक चीनी चिकित्सा को आगे बढ़ने में मदद की है। यह चिकित्सा के सबसे पुराने और प्रचलित रूपों में से एक है। इसका उपयोग यूनानियों द्वारा भी किया जाता था। 

संक्षेप में कहें तो आयुर्वेद (ayurveda) का अस्तित्व बहुत पहले से था। आधुनिक चिकित्सा की शुरूआत ने और भारत में लगातार विदेशी आक्रमण के वजह से इस कला को महत्व नहीं मिला। वर्तमान में, आधुनिक चिकित्सक इस प्राचीन कला के महत्व को समझ रहे हैं और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ आयुर्वेद (ayurveda) का संबंध बनाकर आयुर्वेद पर अधिक शोध लाने की भी कोशिश के जा रही है। चिकित्सा विज्ञान में इस नई प्रगति के साथ लोगों के विचारधारा और जीवन शैली में भी बहुत तेजी से बदलाव आ रहे है।

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