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टमाटर की खेती कैसे करें, यहां जानें | tamatar ki kheti

टमाटर की खेती (tamatar ki kheti) सब्जियों की जायका ही नहीं बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने का भी काम करती है।

टमाटर की खेती! जानिए इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें

tamatar ki kheti: टमाटर (tomato) बहुत ही लोकप्रिय सब्जी है। टमाटर का उपयोग सब्जियों का जायका बढ़ाने में खूब होता है। इसका उपयोग टमैटो सॉस, चटनी, चाट बनाने में खूब होता है। टमाटर में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर, आयरन और कैल्शियम जैसे कई पोषक  तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता हैं। टमाटर की खेती (tamatar ki kheti) सब्जियों की जायका ही नहीं बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने का भी काम करती है।

तो आइए, आज के इस लेख में टमाटर की खेती (tamatar ki kheti) कब और कैसे करें? इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें जानते हैं। 

इस ब्लॉग में आप जानेंगे-

  • टमाटर की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु
  • टमाटर की उन्नत किस्में
  • बुआई का समय
  • बुआई की विधि
  • खरपतवार नियंत्रण
  • खाद और उर्वरक प्रबंधन
  • सिचाई प्रबंधन
  • फसल की तुड़ाई
  • टमाटर में लगने वाले रोग और उसके रोकथाम
  • टमाटर की मार्केटिंग कैसे करें
  • टमाटर की खेती में लागत, पैदावार और मुनाफा

टमाटर की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

टमाटर की फसल के लिए काली दोमट मिट्टी, रेतीली दोमट मिट्टी और लाल दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। हल्की मिट्टी में भी टमाटर की खेती (tomato ki kheti) अच्छी होती है। टमाटर की अधिक पैदावार के लिए मिट्टी का पीएच मान 7 से 8.5 के बीच होना चाहिए। 

टमाटर की उन्नत किस्मों की खेती सालभर की जा सकती है। इसके लिए किसी खास प्रकार की भूमि या जलवायु की आवश्यकता नहीं होती है। टमाटर के बीज को अंकुरित होने के लिए 20-25 डिग्री का तापमान उपयुक्त होता है। टमाटर के पौधे के विकास के लिए 18-30 डिग्री तापमान उपयुक्त होता है।

टमाटर की उन्नत किस्में

टमाटर की खेती (Tamatar ki kheti) के लिए टमाटर की अच्छी प्रजाति के बीजों का चुनाव करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप बाजार या कृषि विज्ञान केंद्र से अधिक जानकारी ले सकते हैं। 

टमाटर की देशी किस्में:

  •  पूसा शीतल पूसा-120
  •  पूसा रूबी
  • पूसा गौरव
  • अर्का विकास
  • अर्का सौरभ 
  • सोनाली 

 टमाटर की हाइब्रिड किस्में: 

  • पूसा हाइब्रिड-1
  • पूसा हाइब्रिड-2
  • पूसा हाईब्रिड-4
  • रश्मि और अविनाश-2 

टमाटर की बुआई का समय

टमाटर की फसल साल में 3 बार ली जा सकती है। इसके लिए मई-जून, सितंबर-अक्टूबर और जनवरी-फरवरी में बुआई की जाती है। 

बुआई की विधि

खेत की तैयारी टमाटर की खेती (tomato ki kheti) आप बीज या नर्सरी तैयार कर सकते हैं। नर्सरी विधि से टमाटर की खेती करने पर अधिक उत्पादन होती है।  

खेत की तैयारी

टमाटर की बुवाई से पहले खेत की मिट्टी पलटने वाले हल से करें। पहली जुताई के बाद मिट्टी में उपयुक्त खाद व कंपोस्ट मिलाकर फिर से एक बार जुताई करवाएं जिससे खाद और कंपोस्ट मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए।

खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार फसल के निमित्त पोषक तत्वों व जल को ग्रहण का फसल को कमजोर करते हैं और उपज के भारी हानि पहुंचाते हैं। फसल को बढ़वार रुक जाती है। इसलिए समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई जरूरी है। यदि खेत में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, जैसे-बथुआ, सेंजी, कृष्णनील, सतपती अधिक हों तो स्टाम्प-30 (पैंडीमिथेलिन) का छिड़काव करें। इससे काफी हद तक खरपतवारों को नियंत्रित कर सकते हैं। 

खाद और उर्वरक प्रबंधन

टमाटर की अधिक उत्पादन के लिए खाद और उर्वरकों का उपयोग से पहले संभव हो तो अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण करवा लेना चाहिए। इसके बाद ही खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करें। वैसे तो टमाटर की खेती (tamatar ki kheti) के लिए सड़ी हुई गोबर खाद, डीएपी, अमोनियम सल्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश बुआई से पहले खेत में छिड़के।

सिचाई प्रबंधन

मिट्टी में नमी आधार पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई फूल निकलने से पहले और दूसरी सिंचाई फलियां बनने के समय करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हल्की सिंचाई करें और खेत में पानी ठहराव न रहे। टमाटर में तापमान सहने की क्षमता अच्छी होती है। इसलिए बहुत जल्दी-जल्दी सिंचाई करने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।

फसल की तुड़ाई

टमाटर के फलों को जब उनकी बढ़वार पूरी हो जाये तथा लाल व पीले रंग की धारियां दिखने लगे उस अवस्था में तोड़ लेना चाहिए व कमरे में रख कर पकाना चाहिए। टमाटर को पौधे पर पकाने की अवस्था में चिड़ियों से नुकसान होने की संभवना रहती है।

 टमाटर में लगने वाले रोग और रोकथाम

आद्र गलन- यह रोग टमाटर के पौधों में बीज अंकुरण से पहले और बीज अंकुरण के बाद भी देखे जाते हैं। इसमें पौधों के बीज और जमीन से लगे रहने वाले भाग सड़ जाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए पिथियम, फाइटोप्फथोरा, स्केलरेसीएम का छिड़काव करें

अगेती झुलसा- टमाटर की खेती में या बीमारी लगने पर पौधों पर छोटे-छोटे धब्बे दिखाई देते हैं और पत्तियां पीली पड़ जाते हैं। इसके निदान के लिए अल्टरनेरिया सोलेनाइ का छिड़काव करें। 

पछेती झुलसा- इस रोग में पौधे के आसपास भूरे रंग का पाउडर गिरा हुआ देखने को मिलता है इससे बचाव के लिए फाइटोप्थोरा इंसिस्टेंस का छिड़काव करें।

फल सड़न- फल सड़न पौधों में टमाटर निकलने के बाद होता है जिसमें फलों पर पीले दाग पड़ जाते हैं और फसल खराब हो जाती है इसे निदान के लिए पैरासिटीका का छिड़काव करें।

मोजैक- टमाटर की खेती में यह रोग लगना साधारण है। यह रोग  लगने पर पौधे की पत्तियां सिकुड़ जाती है इससे बचाव के लिए गंधक का छिड़काव करें।

टमाटर की मार्केटिंग कैसे करें

अगर आप टमाटर की खेती (tomato ki kheti) गांव में रहकर कर रहे हैं तो तुड़ाई के बाद जब मंडियों में अच्छे दाम मिल रहे हो तो आप उसे अपने गांव के बाजार या आसपास की मंडियों में बेच सकते हैं। अगर आप बड़े पैमाने पर इस फसल की खेती कर रहे हैं तो आप चाहे तो एक शहर से दूसरे शहर में भी अपनी फसल को भेज सकते हैं जिससे आपको अच्छा मुनाफा मिल सकता है।

इसके अलावा आप चाहे तो अपने टमाटर की प्रोसेसिंग करने वाली कंपनियों से संपर्क कर भेज सकते हैं या फिर खुद भी सॉस बनाने का काम शुरू कर सकते हैं जिससे आपको सालभर अच्छी आमदनी मिल सकती है।

टमाटर की खेती में लागत, पैदावार और मुनाफा

टमाटर की खेती (tamatar ki kheti) साल भर की जा सकती है। अगर आप नर्सरी तैयार करके अच्छी किस्म के टमाटर लगाते हैं तो सालभर में प्रति एकड़ लगभग 5 से 6 लाख का मुनाफा कमा सकते हैं। इसके अलावा अगर आप सॉस, चटनी, आचार, खटाई बनाने का काम करते हैं तो आपकी कमाई में लगातार बढ़ोतरी होगी।

ये तो थी, टमाटर की खेती (tamatar ki kheti) की बात। यदि आप इसी तरह कृषि, मशीनीकरण, सरकारी योजना, बिजनेस आइडिया और ग्रामीण विकास की जानकारी चाहते हैं तो इस वेबसाइट की अन्य लेख जरूर पढ़ें और दूसरों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें। 

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