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सनई की खेती कैसे करें? यहां जानें | sanai ki kheti

सनई भारत में उगाई जाने वाली मुख्य फसल है। सनई (sanai) एक तेजी से उगने वाली फलीदार फसल है, जो रेशे और हरी खाद के लिए उगाई जाती है।

सनई की खेती कैसे करें? यहां जानें | sanai ki kheti

sanai ki kheti: सनई (sanai) एक तेजी से उगने वाली फलीदार फसल है, जो रेशे और हरी खाद के लिए उगाई जाती है। जब इसे मिट्टी में मिलाया जाता है, तो खारेपन और खनिजों के नुकसान को रोकती है और मिट्टी में नमी बनाए रखती है। सनई की खेती (sanai ki kheti) से किसानों को दोहरा लाभ होता है। सनई की फसल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है तो दूसरी ओर इसके रेशों से रस्सी बनाई जाती है। 

सनई भारत में उगाई जाने वाली मुख्य फसल है। यह खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है साथ ही अच्छा उत्पादन भी देती है। 

बुआई का समय 

सनई की फसल के लिए अधिक पानी की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि सनई की बुआई जून से अगस्त तक की जाती है। 

सनई की प्रमुख किस्में 

नरेंद्र सनई 1, पीएयू 1691, स्वस्तिक,अंकुर, टी 6, के 12 आदि।

इन राज्यों में की जाती है खेती 

महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान, ओडिशा और उत्तरप्रदेश में इसकी खेती की जाती है। 

बीज की मात्रा 

हरी खाद के लिए 20 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ काफी हैं और रेशे लिए 10 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ बो सकते हैं। 

खेत की तैयारी 

  • सबसे पहले खेती की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा कर लें 
  • रेतली चिकनी या चिकनी मिट्टी वाली ज़मीन इसकी खेती के लिए सबसे अनुकूल हैं।

ऐसे करें सनई की बुआई 

  • बीज को बिजाई के लिए एक रात पहले पानी में भिगोकर रखें। 
  • अब इन्हें सुखाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। 
  • हरी खाद के लिए बुआई करने के लिए इसकी बिजाई छींटे द्वारा करें। 
  • बीज लगाते वक्त पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेंटीमीटर रखें। 
  • बीज लगाने से पहले ज़मीन में अच्छी तरह नमी रखें। 
  • बीज को 3-4 सेंटीमीटर गहराई में बोएं। 
  • हरी खाद के लिए फासफोरस 16 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालें। 
  • इसमें नाइट्रोजन वाली खाद का प्रयोग नहीं किया जाता पर कई 4-6 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डाल सकते हैं।

सिंचाई 

हरी खाद लेने के लिए आवश्यकता अनुसार सिंचाई करें। बीज उत्पादन के लिए फूल आने के समय और दाने बनने के समय पानी की कमी ना आने दें। 

फसल की कटाई 

बीज उत्पादन के लिए फसल को बीजने के 150 दिनों के बाद (मध्य अक्तूबर के नवंबर के शुरू में) काट लें। वहीं हरी खाद वाली फसल को बीजने के 45-60 दिनों के बाद मिट्टी में मिला दें।

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