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मोती की खेती | Pearl Farming in Hindi

मोती पालन एक व्यवसाय है जिसमें काम लागत में लाखों रूपए कमा सकते हैं। तो आइए, द रुरल इंडिया के इस लेख में जानें- मोती की खेती कैसे करें।

मोती की खेती (moti ki kheti): रोजगार का एक बेहतर विकल्प

क्या कभी आपने सोचा है… गले में चमकते रंग बिरंगी मोतियां (Pearls) आपकी जिंदगी रोशन कर सकती है। बाजार में आप जितने भी महगें आभूषणों को देखते हैं वह आपके लिए रोजगार का एक सुनहरा अवसर बन सकता है। चाहे आप अमीर है या गरीब ये मोतियां आपकी ज़िंदगी बदल सकती हैं।

 

अक्सर ऐसा होता है कि बहुत लोगों के पास बड़ी-बड़ी डिग्रियां तो होती है लेकिन उनके पास रोजगार नहीं होते, कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो बाकियों की तरह  कर्ज लेकर कोई व्यवसाय शुरू करते हैं। जानकारी के अभाव में और बाजारों में प्रतियोगिता की वजह से उनका व्यापार नहीं चल पाता जिस वजह से एक तो वह कर्ज में डूब जाते हैं और उनकी माली हालत भी खराब हो जाती है।

 

तो आइए, द रुरल इंडिया के इस लेख में जानें- मोती की खेती कैसे करें, (moti ki kheti kaise kare)

 

जी हां, हम बात कर रहे हैं- मोती की खेती (moti ki kheti) यानी मोती पालन की। मोती पालन एक व्यवसाय है जिसमें काम लागत में लाखों रूपए कमा सकते हैं। 

तो सबसे पहले जान लेते हैं मोती पालन (moti palan) क्या है?

मोती पालन क्या है

मोती पालन( moti ki kheti)

मोती पालन (moti palan) को मोती की खेती भी कहा जाता है। इस खेती में समुद्री जीव घोंघा के जरिए मोती उपजाया जाता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर घोंघा से मोती उपजाना कैसे संभव है?

जिसका जवाब है, हां…

दरअसल, घोंघा अपने शरीर से निकलने वाले चिकने तरल पदार्थ से अपने ऊपर एक कठोर परत का निर्माण करता है, जो उसका घर होता है। उस परत के अंदर घोंघा अपने आप को सुरक्षित भी रखता है। यही घर मोतियों के निर्माण में सहायक होता है। जो बेहद खूबसूरत और चमकीले होते हैं। 

 

मोती पालन के लिए आवश्यक जलवायु और प्रक्रिया

मोती उपजाने के लिए अलग-अलग तरह के सीपों का इस्तेमाल किया जाता है। सीपों के हजारों प्रकार होते हैं। उनके शेल भी कई रंगों के होते हैं।

जैसे- गुलाबी, लाल, पीला, नारंगी ,भूरा और भी कई रंग के हो सकते हैं। 

मोती की खेती (moti ki kheti) के लिए ठंड का मौसम उपयोगी माना जाता है।

  • सबसे पहले सीपों को तालाब या नदी से इकट्ठा किया जाता है। 
  • उसके बाद 15 दिनों तक उसे पानी में छोड़ दिया जाता है.
  • 15 दिनों के बाद सीपों की सर्जरी की जाती है। सर्जरी के अंतर्गत प्रत्येक सीप के भीतर 4 से 6 मिलीलीटर व्यास वाले साधारण या डिजाइनर बीड जैसे किसी भगवान या फूल पत्तों की आकृति डाले जाते हैं।
  • बीजों को अंदर डाल कर सीपों को बंद कर दिया जाता है.
  • उसके बाद सीपों को नाइलॉन बैग में रखकर, बांस या पीवीसी की पाइप से लटका कर तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है।
  • करीब 1 साल के अंदर मोती बनकर तैयार हो जाता है।
  • उन सीपों को निकालकर उनसे मोतिया निकाली जाती है।
  • 1 साल के अंदर सीपों को खाना भी दिया जाता है।
  • साथ ही साथ कई तरह की सावधानियां भी बरती जाती हैं जिसकी जानकारी लेख में आगे पढ़ने पर आपको मिल जाएगी।

मोती पालन के लिए जरूरी सामान

  1. कम से कम 10 गुना फीट या बड़े आकार का तालाब. 0.4 हेक्टेयर जैसे छोटे तालाब में अधिकतम 25000 सीप से मोती उत्पादन किया जाता है।
  2. सीपों के कई प्रकार होते हैं। इनके कई रंग होते हैं, लेकिन खेती के लिए बाईवाल्वज किस्म के घोंघे का इस्तेमाल होता है, इनमें से भी ओएस्ट घोंघा सबसे ज्यादा मोती बनाता है।
  3. सीपों का खाना जैसे एलगी, कैल्सियम और दवाइयां जिसे सीप के अंदर डाला जाता है जिन्हे सीप खाते हैं।

 

मोती पालन के लिए प्रशिक्षण (pearl farming training)

इस कार्य के लिए प्रशिक्षण लेना जरूरी है। अगर आप चाहें तो किसी विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से सीख सकते हैं अथवा यूट्यूब चैनल के जरिए भी सीख सकते हैं। सीपों की बात करें तो आप इसे कोलकाता, भूवनेश्वर आदि समुद्री तटीय बड़े शहरों से मंगा सकते हैं।

 

मोती पालन (moti palan) में इन बातों का रखें खास ख्याल

मोती पालन करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • सर्जरी करते वक़्त सिखाए गए नियमों का पालन करें।
  • सीपों के अन्दर मोती का बीज सही जगह पल डालें।
  • सीपों को ज़मीन से डेढ़ फूट की ऊंचाई पर रखें।
  • क्यूंकि इसका अमोनिया नीचे होता है। सीप उसे खाकर मर सकते हैं।
  • सीपों को 2-3 घंटे से ज़्यादा पानी के बाहर न रखें।
  • समय-समय पर उन सीपों की जांच करते रहें।
  •  सीपों को छू कर ही पता लगाया जा सकता है की वो जीवित हैं या मृत।
  • अगर सीप जीवित होंगे तो छूने के साथ ही अपना मुंह बंद कर लेंगे अथवा वो अपना मुंह बंद नहीं करेंगे।

 

मोती पालन में लागत और कमाई

  • मोती पालन (moti ki kheti) में तकरीबन 8 से 10 हजार की शुरुआती लागत है जिसके एवज में सलाना 6 से 8 लाख का मुनाफा होता है। दरअसल एक सीप की कीमत 8 से 12 रुपए है।
  • प्रत्येक सीप में दो मोतियों को उपजाया जाता है। यह मोतियां तैयार होकर जब बाजार में जाती हैं तो वहां एक मीमी से 20 मीमी सीप के मोती का दाम करीब 3 सौ से लेकर 15 सौ रुपए हो जाता है। 
  • अगर आप 1 एकड़ में पारंपरिक खेती करते हैं तो आपको 50 हजार का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8 से 10 लाख।
  • डिजाइनर मोतियां 12 महीने में तैयार हो जाती है जिस की डिमांड बाजार में ज्यादा है।
  • मोती पालन बाकी व्यवसाय से अलग है इस वजह से प्रतियोगिता का डर नहीं होगा। नए व्यापारी आराम से बाजार में अपने व्यापार का विस्तार और संचालन कर सकते हैं।
  • बचे हुए सामान से हस्तकला से जुड़ी कोई दूसरा उद्योग भी चला सकते हैं जिससे ना केवल आपकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि आप दूसरों को भी रोजगार देंगे।
  • एक तालाब मे बहुउद्देशीय योजना का लाभ लेकर 8-10 प्रकार के व्यापार करके आय में वृद्धि कर सकते हैं।
  • अगर इस व्यापार में महिलाओं की भागीदारी होगी तो इससे ना केवल गांव देहात की महिलाएं सशक्त होंगी बल्कि वे ज्वेलरी का भी फायदा ले सकेंगी।

 

भारत में मोती पालन (Pearl farming in India)

भारत में मोती पालन को मोती की खेती (moti ki kheti) भी कहा जाता है। इसे फ्रेश वाटर पर्ल कल्चर और साल्ट वॉटर पर्ल कल्चर कहा जाता है। भारत में मोतियों को मीठे पानी के सीपों से बनाया जाता है। 

भारत में हर तरह की मोतिया बनाई जाती है जैसे आधी गोल मोतिया अलग-अलग आकार वाली मोतियां, डिजाइनर मोतियां जिन पर भगवान गणेश या पुष्प आदि के चित्र बने होते हैं।

मोतियों के आकार प्रकार के अनुसार मोतियों की तैयार होने की अवधि में अंतर आ जाता है जैसे आधी गोल वाली डिजायनर मोतियां 1 साल के अंदर बनकर तैयार हो जाती है। वहीं पूरी गोल वाली मोतियां 2 से 3 साल का वक्त लेती हैं। हालांकि भारत में ज्यादातर अर्धगोल मोतियां ही बनाई जाती है जो काफी डिमांड में रहती है। पूरी गोल मोतियां चीन में बनाई जाती है।

 

ये तो थी, मोती पालन (moti ki kheti) की बात। लेकिन, The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजना और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे, जिनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इस लेख को शेयर करें।

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