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moti ki kheti: मोती की खेती कैसे करें, यहां जानें

मोती की खेती (moti ki kheti) ऐक्वाकल्चर व्यवसाय का हिस्सा है। इस व्यवसाय में सीप का पालन किया जाता है। जिससे महंगी मोतियां प्राप्त होती है।

moti ki kheti : मोती की खेती कैसे करें

मोती पालन (pearl farming) का व्यवसाय आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। जिस तरह से मछली पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन को मुनाफे के रोजागर के रूप में जाना जाता है ठीक उसी तरह से मोती की खेती (moti ki kheti) करके बढ़िया मुनाफा कमाया जा सकता है। मोती को समुद्र से निकालना अब पुराने जमाने की बात हो गई है, प्रशिक्षण हासिल करके मोती पालन का काम सीखा जा सकता है।

देश में कई ऐसे भी हजारों किसान हैं जो मोती पालन के साथ-साथ मछली पालन करके कई गुना लाभ कमा रहे हैं। 

तो आइए, द रूरल इंडिया के इस ब्लॉग में मोती की खेती (moti ki kheti) को करीब से जानें। 

मोती की खेती क्या है? (What is pearl farming?)

मोती की खेती (moti ki kheti) ऐक्वाकल्चर व्यवसाय का हिस्सा है। इस व्यवसाय में सीप का पालन किया जाता है। जिससे बहुत ही महंगी मोतियों की प्राप्त होती है। लाभ की दृष्टि से भी किसानों के लिए मोतियों की खेती (pearl farming) एक अच्छा विकल्प है।

आपको बता दें, मोतियों का उत्पादन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें सीप को पानी में 8-10 महीने पाला जाता है। 

moti ki kheti : मोती की खेती कैसे करें

ऐसे बनता है मोती

मोती एक प्राकृतिक रत्न है जो सीप के भीतर बनता है। सीप यानी घोंघे का घर। घोंघा जब भोजन करने के लिए सीप से अपना मुंह बाहर निकलता है तब अनचाहे परजीवी  भी उसके साथ चिपककर सीप के अंदर प्रवेश कर जाते हैं जिनसे छुटकारा पाने के लिए घोंघा अपने ऊपर रक्षा कवच बनाना शुरू कर देता है जो आगे चलकर मोती का रूप धारण करता है, ये प्राकृतिक प्रक्रिया होती है मोती के बनने की। इसी प्रक्रिया को जब कृत्रिम तरीके से कराया जाता है तब इसे मोती पालन (moti palan) या पर्ल कल्चर कहा जाता है। 

आपको बता दें, एक मोती की कीमत दो सौ से दो हजार तक की होती है और अगर मोती उच्च गुणवत्ता का है तब इसकी कीमत लाखो तक हो सकती है।

मोती की खेती में लागत और कमाई (Cost and Earnings in Pearl Farming)  

जब पहली बार मोती की खेती (pearl farming) का काम शुरू करते है तो एक फिक्स लागत आती है जो सिर्फ एक बार लगाना पड़ता है जैसे तालाब, एक छप्पर (या सर्जिकल हाउस) जहां सर्जिकल इत्यादि का काम करना होता है। ये लागत हर बार नहीं आएगी।

मोती पालन के लिए सर्जिकल सेट की जरूरत होगी ये भी एक बार का ही निवेश होता है। सर्जिकल हाउस में कुछ टेबल कुर्सी की जरूरत होगी ये भी एक बार का ही निवेश है।

इसके अलावा तालाब में खाद और उर्वरक समय-समय पर डालते रहना पड़ता है। तालाब में मृत सीप को बार-बार निकलते रहना पड़ता है जिसको करने पर कुछ लागत आती है।

अगर आप बड़े पैमानें पर मोती पालन (moti palan) शुरू कर रहे हैं तब स्किल्ड कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी इनका खर्च भी अलग से करना पड़ता है।

moti ki kheti : मोती की खेती कैसे करें

मोती की खेती कैसे शुरू करें (how to start pearl farming)

मोती पालन का रोजगार शुरू करने के लिए एक 20 गुना 10 के तालाब की जरूरत होगी जिसकी गहराई लगभग 5-6 फीट हो। अगर ये सुविधा न हो तब भी छोटे स्तर पर उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करके घर मे ही टैंक बनाकर मोती की खेती की जा सकती है।

मोती पालन (pearl farming) के लिए वयस्क सीपों की जरूरत होगी जिसे नदी, तालाब, नहर आदि जगहों से एकत्र किया जा सकता है। सीप को खरीद भी सकते हैं। सीप का आकार लगभग 8-10 सेंटीमीटर का होना चाहिए। इनका चयन बेहद सावधानी से करना है ध्यान रखें कि कोई भी सीप मृत न हो और सभी वयस्क ही हों।

जिस आकर का मोती चाहिए उस हिसाब से बीज का चुनाव करना होता है। शल्य क्रिया द्वारा सीप के अंदर बीजों को डाला जाता है और 10 दिनों के लिए किसी नायलॉन के बैग में रखकर उसका निरीक्षण किया जाता है। इस दौरान उसे प्राकृतिक चारे पर रखा जाता है और यदि कोई सीप मरता है तो उसे बाहर कर दिया जाता है।

सीप को तालाब में डालने के बाद उसका खास ख्याल भी रखा जाता है। सीप के अंदर का जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकता इसलिए उसे बाहर से आहार देना पड़ता है, गोबर खाद, केले के छिलके इत्यादि से इनका काम हो जाता है।

मोती की खेती के फायदे (Benefits of pearl farming)

  • मोती पालन से न सिर्फ आर्थिक लाभ होते हैं बल्कि यह पर्यावरण की दृष्टि से भी हितकारी है। मोती से जल प्रदूषण जैसी समस्या से निजात पाया जा सकता है, यह जल को साफ करने का काम करता है जिससे पानी को गंदा होने से बचाया जा सकता है।
  • आज जहां किसान बाढ़, सूखे जैसी समस्याओं से जूझ रहा हैं वहां मोती पालन, मछली पालन जैसे वाणिज्यिक खेती को पारम्पारिक खेती के साथ विस्थापित करके बढ़िया कमाई कर सकते हैं।
  • इन सब के इतर मोती एक रत्न है जिसका उपयोग आभूषण बनने में किया जाता है जिसका बाज़ार में अच्छी कीमत है।

मोती की खेती की चुनौतियां और उनका समाधान (Pearl farming challenges and their solutions)

मोती की खेती (moti ki kheti) में सबसे बड़ी जो चुनौती आती है, वह है फंड(धन) की। आपको यहां बताते चलें कि सरकार छोटे उद्यम और इस प्रकार के कल्चर को शुरू करने के लिए लोन मुहैया कराती है। नाबार्ड जैसे ग्रामीण बैंक से आसानी से पैसा मिल जाता है जिससे आप अपना स्वयं का रोजगार शुरू कर सकते हैं। मुद्रा लोन भी है जो छोटे लोन देती है अपना उद्यम शुरू करने के लिए।

पारंपरिक किसान कैसे कर सकते है मोती पालन, बिना किसी जानकारी के, ये बड़ा सवाल है। हालांकि आज ये बड़ा सवाल नहीं है क्योंकि देश के लगभग कई स्थानों में ऐसे ट्रेनिंग सेंटर है जहां आप जाकर मोती पालन सीख सकते हैं। या फिर जो लोग पहले से ही मोती पालन का रोजगार कर रहे हैं उनके यहां जाकर भी सीख सकते हैं।

अगर अपनी जमीन न हो तो कैसे करें मोती पालन, ये भी सवाल मन में आता है। यदि अपनी स्वयं की जमीन न हो तो लीज पर जमीन या तालाब लिया जा सकता है। इसका खर्च तो बढ़ेगा लेकिन आपको सरकार की तरफ से मदद मिलती है, तो आप को चिंता की जरूरत नहीं है।

moti ki kheti : मोती की खेती कैसे करें

मोती की खेती का ट्रेनिंग सेंटर (moti farming training center)

किसी भी व्यवसाय की सफलता के लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है। मोती पालन की ट्रेनिंग से किसानों को बहुत फायदा मिलता है। इसके लिए आप अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। 

मोती पालन का प्रशिक्षण कई संस्थान कराते हैं जिनमें ओडिशा स्थित ‘केंद्रीय जल संस्थान’ एक प्रमुख संस्थान है। यहां लगभग 15 दिन की मोती पालन विषय पर ट्रेनिंग दी जाती है जिसे सीखने के बाद कोई भी मोती पालन (moti farming) का काम शुरू कर सकता है।

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