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हरी मिर्च की खेती कैसे करें? यहां जानें | Mirch ki kheti

सब्जियों की खेती में मिर्च की खेती (Mirch ki kheti) करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। क्योंकि मिर्च की मांग बाजार में सालभर बनी रहती है।

Mirch ki kheti: चटपटे भोजन का स्वाद लेना हो तो मिर्च (Chili) का नाम सबसे ऊपर आता है। हरी मिर्च (Green Chili) एक ऐसी चीज है, जिसका नाम सुनते ही कुछ तीखा और चटपटा स्वाद याद आने लगता है। भोजन शाकाहारी हो या मांसाहारी, बिना मिर्च के भोजन में जायका लाना बेहद ही मुश्किल है। 

मिर्च (Chilli) न केवल हमारे भोजन का एक अहम हिस्सा है बल्कि सेहत के लिए भी कई गुणों से भरपूर है। सेहत के गुणों के खजाने से भरी मिर्च (chilli) को मसाले, दवाई और अचार के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें विटामिन ए, सी, फॉस्फोरस, कैल्शियम पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।

सेहत के साथ-साथ मिर्च की खेती (mirch ki kheti) से कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। सब्जियों की खेती में मिर्च की खेती (chilli cultivation) करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसकी खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक होती है। क्योंकि इसकी मांग बाजार में सालभर बनी रहती है।

Chilli cultivation :  हरी मिर्च की खेती

तो आइए, द रुरल इंडिया के इस लेख में मिर्च की खेती (mirch ki kheti in hindi) को विस्तार से जानें।

इस लेख आप जानेंगे

  • मिर्च की खेती पर एक नजर
  • मिर्च के लिए ज़रूरी जलवायु
  • खेती के लिए उपयोगी मिट्टी
  • खेती का सही समय
  • खेती की तैयारी कैसे करें
  • मिर्च की उन्नत किस्में
  • सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन
  • रोग एवं कीट प्रबंधन 
  • मिर्च की खेती में लागत और कमाई

मिर्च की खेती (Chilli cultivation) पर एक नजर

भारत को मसालों का देश कहा जाता है। लेकिन भारत में मिर्च 17वीं सदी में पुर्तगालियों के द्वारा गोवा लाई गई थी। इसके बाद यह पूरे भारत में फैल गई। भारत के किसान हरी मिर्च (Green Chilli), शिमला मिर्च (capsicum), लाल मिर्च (Red Chilli) की खेती करते हैं। 

आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा, तामिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान हरी मिर्च (Green chilli) पैदा करने वाले भारत के मुख्य राज्य हैं।

 

मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

वैसे तो भारत में पूरे वर्ष मिर्च की खेती (mirch ki kheti) की जाती है। मिर्च की फसल के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु (Hot and humid climate) उपयुक्त होती है। इसके लिए ज्यादा ठंड और गर्मी दोनों ही हानिकारक होते हैं। मिर्च की खेती (Chilli cultivation) के लिए 15-35 डिग्री सेल्सियस तापमान होना सही होता है। हालांकि इसके पौधे को करीब 100 सेन्टीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। इसके अलावा हरी मिर्च (Green chilli) की फसल पर पाले का प्रकोप अधिक होता है।

 

हरी मिर्च के लिए उपयुक्त मिट्टी

मिर्च के लिए मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 सही माना जाता है। वैसे तो मिर्च को अच्छे जल-निकास वाली सभी प्रकार की भूमि में पैदा किया जा सकता है। फिर भी फसल के लिए जीवांशयुक्त दोमट (loamy loam) या बलुई मिट्टी, जिसमें कार्बनिक पदार्थ (Organic matter) की मात्रा अधिक हो सबसे उपुयक्त मानी जाती है।

हरी मिर्च की खेती के लिए सही समय

बरसाती मिर्च की खेती (mirch ki kheti) के लिए बीज मई-जून में बोनी चाहिए। फसल तोड़ने के लिए जून-जुलाई का समय सही है। दूसरी फसल के लिए सितम्बर-अक्टूबर का समय सही माना गया है। वहीं, गर्मी के मौसम की फसल के लिए फरवरी-मार्च में बुआई करनी चाहिए।

ऐसे करें मिर्च की खेती (mirch ki kheti) की तैयारी 

भूमि को करीब 3-4 बार जुताई करें और पाट्टा देकर खेत को समतल बनाकर अच्छी तरह से तैयार कर लें। इसी समय सड़े गोबर की खाद (Rotted manure) 10 टन प्रति एकड़ के हिसाब से डालें।

हरी मिर्च की उन्नत किस्में

अलग-अलग क्षेत्रों के जलवायु के हिसाब से मिर्च की किस्में की खेती की जाती है। अगर हाइब्रिड उन्नत किस्म (Hybrid improved variety) की मदद से खेती करें, तो ज्यादा अच्छा रहता है।

 

मसाले वाली हरी मिर्च की किस्में

पूसा ज्वाला, पन्त सी- 1, एनपी- 46 ए, कल्याणपुर चमन, भाग्य लक्ष्मी, आर्को लोहित, पंजाब लाल, आंध्रा ज्योति और जहवार मिर्च- 283 आदि प्रमुख हैं।

 

आचार वाली हरी मिर्च की किस्में

केलिफोर्निया वंडर, येलो वंडर, हाइब्रिड भारत, अर्का मोहिनी, अर्का गौरव, अर्का मेघना, अर्का बसंत, काशी अर्ली, तेजस्विनी, आर्का हरित और पूसा सदाबहार इत्यादि।

सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन

मिर्च की फसल को भूमि के आधार पर सिंचाई कर सकते हैं। मिर्च की फसल में फूल और फल बनते समय सिंचाई (Irrigation) जरूर करनी चाहिए। इस अवस्था में सिंचाई न करने पर मिर्च के फल और फूल गिर जाते हैं। इसके साथ ही मिर्च की फसल में पानी नहीं रूकने देना चाहिए। खेत की अंतिम जुताई से पहले अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में डालनी चाहिए।

रोग एवं कीट प्रबंधन

मिर्च (Chilli) की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग आर्द्रगलन, फफूंद, जीवाणु जम्बलानी आदि है। रोगों की रोकथाम के लिए बुवाई के समय बीजों को अच्छे से उपचारित करना चाहिए। रोगी पौधों को खेत से उखाड़ देना चाहिए।

कीट नियंत्रण

मिर्च की फसल में लगने वाले किट थ्रिप्स, सफेद मक्खी और माईट प्रमुख हैं। इनकी रोकथाम के लिए डाइथेन एम 45 या मेटासिस्टोक 1 लिटर को 700 से 800 लिटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर 10 से 15 दिन के अन्तराल में छिड़काव करना चाहिए।

हरी मिर्च की खेती में लागत और कमाई 

हरी मिर्च (Green chilli) एक नकदी फसल है। हरी मिर्च की एक एकड़ खेती की लागत औसतन 35-40 हजार रुपये है। इसकी औसतन उपज 60 क्विंटल तक होती है। अगर बाजार में यह 40 रुपये प्रति किलो भी बिके, तो किसान को 45-50 हजार रुपये का मुनाफा होगा। हरी मिर्च (Green chilli) को सब्जी मंडी में बेच सकते हैं। ई-कॉमर्स कंपनी के माध्यम से पैकिंग कर भी बेच सकते हैं।

 

ये तो थी मिर्च की खेती (mirch ki kheti) की बात। लेकिन, The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजना और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे, जिनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं।

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