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लीची की खेती कैसे करें? यहां जानें | litchi ki kheti

पूरे देश का 40 प्रतिशत लीची की खेती (lichi ki kheti) बिहार में होती है। इसकी खेती से किसानों को काफी अच्छा लाभ होता है। 

litchi ki kheti: लीची (Lychee) उत्पादन में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। हमारे देश में लगभग 92 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती (litchi cultivation) होती है। पूरे देश का 40 प्रतिशत लीची की खेती (lichi ki kheti) बिहार में होती है। इसकी खेती से किसानों को काफी अच्छा लाभ होता है। 

 

यदि आप भी बागवानी करने के शौकीन हैं तो आपको लीची की बागवानी जरूर करनी चाहिए। 

 

तो आइए, लीची की खेती (lichi ki kheti) की संपूर्ण जानकारी आसान भाषा में जानें। 

 

लीची की खेती के लिए जलवायु और मिट्टी

लीची की खेती (lichi ki kheti) के लिए उत्तर भारत की जलवायु बहुत ही उपयुक्त है। खासतौर पर बिहार राज्य में इसकी खेती अधिक मात्रा में होती है। भारत में लीची की खेती बिहार के अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में की जाती है। लीची की खेती गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में होती है। इसके लिए 25 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की जरूरत होती है। 

 

मिट्टी की बात करें तो लीची के लिए बलुई दोमट मिट्टी का उपयोग किया जाना चाहिए। लीची की अच्छी उपज के लिए मिट्टी का पीएच 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए। जलजमाव वाले खेत में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए।  

 

लीची की खेती की विशेष बातें

  • इसके पौधों की रोपाई खेत में जुलाई से लेकर अगस्त तक की जाती है। 
  • प्रति हेक्टेयर 100 पौधों की जरुरत होती है। 
  • यह फसल दो से तीन साल में फल देना शुरू कर देती है। 
  • लीची का पेड़ करीब 60 से 80 साल तक फल देती है। 

 

खेती की तैयारी 

  • खेत की तिरछी जुताई करके खेत से सभी खरपतवार को निकाल लें। 
  • खेती में पाटा चलाकर इसे समतल बना लें। 
  • खेत को कुछ इस तरह तैयार करें कि इसमें पानी नही रुके। 
  • पौधों की रोपाई के 30 दिन पहले 1*1*1 वर्ग फीट का गड्ढा खोंदें। 
  • कीट और फफूंदनाशक डालकर छोड़ दें।

 

लीची की उन्नत किस्में (varieties of lychee)

अर्ली बेदाना लीची

यह लीची की अगेती उन्नत किस्म है। इसके फल स्वाद में मीठे और छिलका लाल होता है। फल 25 से 30 अप्रैल के बाद पकने शुरू हो जाते हैं। यह किस्म 20 से 25 साल तक फल देता है। इस किस्म का छिलका मुलायम और गूदा सफेद होता है। 

 

स्वर्ण रूपा

लीची की यह किस्म के फल मध्यम आकार के और गुलाबी होता है। इसमें 9 से 9.5 प्रतिशत तक शर्करा की मात्रा पाई जाती है। इसके फल 25 से 30 मई तक पूर्ण रुप से पककर तैयार हो जाते हैं। इसके प्रत्येक पौधे से 90 से 100 किलो तक फल प्राप्त हो जाता है।

 

अर्ली लार्ज रेड

लीची की इस किस्म के फल बड़े आकार और लाल रंग के होते हैं। इसमें शर्करा की मात्रा 10 प्रतिशत तक पाई जाती है। यह किस्म 15 से 20 मई तक पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म के फल का वजन 20 से 25 ग्राम के बीच होता है। 

 

शाही लीची 

लीची की शाही किस्म बहुत ही प्रसिद्ध है। शाही लीची अगेती उन्नत किस्म है। फल में गूदे की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसके फल 10 से 15 मई  के बाद पकने शुरू हो जाते हैं। इस किस्म के प्रत्येक पौधे से 100 से 110 किलो तक फल प्राप्त हो जाता है। 

 

चाइना लीची

चाइना लीची पिछेती उन्नत किस्म है। फलों का रंग गहरा लाल और आकार मध्यम होता है। फलों में गूदे की मात्रा अधिक पाई जाती है। प्रत्येक पौधे से 80 से 90 किलोग्राम तक उपज प्राप्त हो जाता है। 

 

मुजफ्फरपुर

जैसा कि आप सभी जानते हैं, बिहार का मुजफ्फरपुर जिला देश में लीची उत्पादन के मामले में सबसे आगे है। यहां का मुजफ्फरपुर किस्म लीची उत्पादन के लिए बहुत खास है। इस किस्म के फल आयताकार और नुकीले होते हैं। फल का वजन 22 से 25 ग्राम तक होता है। इसे लेट लार्ज रेड किस्म के नाम से भी जाना जाता है। इसमें 10 से 11 प्रतिशत तक शर्करा की मात्रा पाई जाती है।  

 

लीची की खेती में लागत और कमाई (Cost and Earning in Litchi Cultivation)

  • लीची की एक पूर्ण विकसित पौधे से 80 से 100 किलो तक की उपज प्राप्त होती है।
  • प्रति हेक्टेयर लगभग 10 टन तक उत्पादन मिल जाता है। 
  • बाजार में लीची 60 से 100 रुपए किलो तक बिक जाती है। 
  • लागत की बात करें तो लीची की खेती (lichi ki kheti) पहले दूसरे साल ही ज्यादा लागत लगती है। 
  • एक हेक्टेयर में लीची की खेती करने में लगभग 1 से 2 लाख का खर्च आता है। 

 

ये तो थी, लीची की खेती (lichi ki kheti in hindi) की जानकारी। यदि आप इसी तरह कृषि, मशीनीकरण, सरकारी योजना, बिजनेस आइडिया और ग्रामीण विकास की जानकारी चाहते हैं तो इस वेबसाइट की अन्य लेख जरूर पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ने के लिए शेयर करें।

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