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धान की फसल को खैरा रोग से कैसे बचाएं | dhan me khaira rog

धान में लगने वाले रोगों के कारण उत्पादन में भारी कमी आती है। धान की फसल में अधिकतर जिन रोगों का प्रकोप होता है उनमें से एक है- खैरा रोग

dhan me khaira rog: भारत में धान (paddy) एक प्रमुख फसल है। धान उत्पादन के मामले में भारत का दूसरा स्थान है। भारत की जलवायु धान की फसल के लिए काफी उपयुक्त है लेकिन धान में लगने वाले रोगों के कारण उत्पादन में भारी कमी आ जाती है। धान की फसल में अधिकतर जिन रोगों का प्रकोप देखने को मिलता है उनमें से एक है- खैरा रोग (khaira rog)। इस रोग के कारण पौधों की पत्तियों में जंग जैसे धब्बे बन जाते हैं। इससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। 

 

तो आइए, द रूरल इंडिया के इस ब्लॉग में जानें- खैरा रोग क्या है? और धान की फसल को खैरा रोग से कैसे बचाएं

 

आपको बता दें, खैरा रोग की सही जानकारी न होने के कारण कई किसान समय से खैरा रोग पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं। जिससे उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और फसल का उत्पादन भी काफी कम हो जाता है। 

 

खैरा रोग से फसल को नुकसान से बचाने के लिए समय रहते इस रोग पर नियंत्रण करना बहुत आवश्यक है।

 

खैरा रोग का कारण और लक्षण (Causes and symptoms of Khaira disease)

  • खैरा रोग मिट्टी में जस्ते की कमी के कारण होता है।
  • इस रोग में धान की पत्तियों पर हल्के पीले रंग के धब्बे हो जाते हैं।
  • खैरा रोग होने पर कुछ समय बाद धब्बे कत्थई या जंग जैसे हो जाते हैं।
  • इससे पत्तियां सूखने लगती हैं।
  • खैरा रोग से पौधा बौना रह जाता है।
  • अधिक प्रकोप होने पर पौधों की जड़े भी कत्थई जैसे रंग की हो जाती है।
  • इस रोग से पौधों में कल्ले कम निकलते हैं।
  • पैदावार में भारी कमी आ जाती है।

खैरा रोग पर नियंत्रण के उपाय (Measures to control Khaira disease in hindi)

  • खैरा रोग से रोकथाम के लिए प्रति एकड़ 10 से 12 किलोग्राम जिंक सल्फेट का इस्तेमाल रोपाई के समय मिट्टी में करें।
  • इसके अलावा पौधों में जिंक की कमी पूरी करने के लिए प्रति एकड़ खेत में 3 से 4 किलोग्राम जिंक का इस्तेमाल करें।
  • इस रोग पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ खेत में 2 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 1 किलोग्राम बुझा हुआ चूना को 400 लीटर पानी में मिला कर छिड़कें।
  • बुझा हुआ चूना उपलब्ध नहीं होने पर 2 प्रतिशत यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं।
  • आवश्यकता पड़ने पर 8 से 10 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें।

ऐसे ही खेती-किसानी की महत्वपूर्ण जानकारी के लिए द रूरल इंडिया से जुड़े रहें। 

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