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अलसी की खेती कैसे करें, यहां जानें | alsi ki kheti

अलसी (linseed) के पौधों में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अलसी को बलकारक, पित्त नाशक, पौष्टिक माना गया है।

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alsi ki kheti: तिलहन फसलों में अलसी (linseed) एक महत्वपूर्ण फसल है। इसकी गिनती रेशेदार फसलों में की जाती है। इसे अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कहीं-कहीं इसे तीसी भी कहते हैं। इसके रेशे का प्रयोग मोटे कपड़े, रस्सी, आदि बनाने में किया जाता है। अलसी के बीज से निकलने वाले तेल का प्रयोग वार्निश, पेंट, साबुन, रंग, आदि तैयार करने में किया जाता है। 

 

अलसी (linseed) के पौधों में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अलसी को बलकारक, पित्त नाशक, पचने में भारी, पौष्टिक, गर्म, पीठ के दर्द और सूजन को खत्म करने वाला माना गया है। इससे हृदय रोग, कॉलस्‍ट्रोल, गठिया, त्वचा आदि रोगों में लाभ मिलता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, वसा, प्रोटीन, विटामिन बी, विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, आदि कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।

 

अलसी की खेती पर एक नज़र (flax farming in hindi)

  • विश्व में अलसी के उत्पादन में भारत का पहला स्थान है।
  • चीन, रूस, पोलैंड, नीदरलैंड, फ्रांस, बेल्जियम अलसी के प्रमुख उत्पादक देश हैं। 
  • भारत में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में इसकी खेती की जाती है।
  • अलसी के बीज में 33 से 47 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती है।
  • अलसी के पौधे और बीज दोनों का प्रयोग किया जाता है।
  • किसानों के लिए अलसी की खेती (alsi ki kheti) मुनाफे का सौदा है।

 

तो आइए, द रुरल इंडिया के इस लेख में जानें- अलसी की खेती कैसे करें? (alsi ki kheti kaise karen)

अलसी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

अलसी रबी के मौसम में उगाई जाती है। इसके लिए समशीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है। बीजों के अंकुरण के लिए 15 से 20 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। इसके लिए बुलई दोमट मिट्टी सबसे अच्छा होता है। इसकी खेती के लिए मिट्टी का पीएचमान 6.5 से 7.5 के बीच होनी चाहिए। जलभराव वाले जमीन में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए। 

 

अलसी की बुआई का उपयुक्त समय

इसकी बुआई के लिए अक्टूबर से नवंबर के प्रथम सप्ताह तक का समय सर्वोत्तम है।

 

अलसी के खेत की तैयारी 

अलसी की खेती (तीसी की खेती) करने से पहले धान की पराली या किसी भी खरपतवार की सफाई कर लें। खेत में पहली जुताई के बाद गोबर या वर्मीकंपोस्ट की खाद 5 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से डाल दें। 

 

पौधों से पौधों की दूरी

  • अलसी की बुआई क्यारियों में करनी चाहिए।
  • सभी क्यारियों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखें।
  • पौधों से पौधों के बीच 5 से 7 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए।
  • बीज की बुवाई करीब 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर करें।

 

बीज की मात्रा

प्रति एकड़ खेत में खेती करने के लिए 12 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

 

बीज उपचारित करने की विधि

  • बुआई से पहले बीज को 2.5 ग्राम थीरम से उपचारित करें।
  • इसके अलावा प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम कार्बेंडाजिम से भी उपचारित कर सकते हैं।
  • बीज उपचारित कर के पौधों को झुलसा रोग, उकठा रोग, आदि से बचाया जा सकता है।

 

सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन

अलसी की खेती के लिए बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है। इसकी बुआई के 10-15 दिनों के बाद हल्की सिंचाई कर दें। फूल लगते समय दूसरी और बीज पकने के समय तीसरी सिंचाई कर दें। उर्वरक कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद की डालें। 

 

अलसी खाने के फायदे (alsi ke fayde)

  • अलसी एनर्जी बूस्टर की तरह काम करता है। 
  • हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
  • वजन कम करने में काफी मददगार है।
  • स्किन और बालों के लिए अलसी रामबाण की तरह काम करता है। 
  • दूध में मिलाकर खाने से नींद अच्छी आती है।

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